कोंडागांव। जिले के शंकरपुर गांव में मानसिक स्वास्थ्य और बाल सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। यूनिसेफ इंडिया और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने गांव का दौरा कर यहां संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया और युवाओं की भागीदारी से चल रहे सामुदायिक मॉडल को प्रभावी एवं प्रेरणादायक बताया।
ग्राम शंकरपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक बस्तरिया लोकनृत्य और मांदर वादन के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और बाल सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक प्रभावों को साझा किया।
"आओ बात करें" अभियान से बढ़ी जागरूकता
ग्रामीणों ने बताया कि "आओ बात करें" अभियान के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर संवाद की संस्कृति विकसित हुई है। इससे लोगों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है और कई सामाजिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिली है।
युवोदय कोंडानार चैंप्स के स्वयंसेवकों ने प्रतिनिधिमंडल को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, बाल सुरक्षा, एनीमिया मुक्ति, टीकाकरण, मातृत्व स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, नशामुक्ति और पॉक्सो कानून से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
युवाओं की भागीदारी बनी बदलाव की ताकत
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। स्वयंसेवकों द्वारा गांव स्तर पर संचालित जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक अभियानों को समुदाय में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।
यूनिसेफ अधिकारियों ने कहा कि युवाओं के नेतृत्व में संचालित यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
कलेक्टर कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक
गांव भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कोंडागांव कलेक्टर कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान शिक्षकों, स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए।
कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने यूनिसेफ प्रतिनिधियों के साथ जिले में संचालित विभिन्न सामाजिक और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी साझा की तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
सामाजिक बदलाव का प्रभावी मॉडल
यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने शंकरपुर में विकसित समुदाय आधारित मॉडल को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक प्रभावी पहल बताया। प्रतिनिधियों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य, बाल सुरक्षा और जनजागरूकता से जुड़े ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।