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सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं को मिला राजमिस्त्री प्रशिक्षण, 280 से अधिक हुए आत्मनिर्भर

अपडेट किया गया: 7 जून 2026

कभी जिन हाथों में बंदूक थी, आज उन्हीं हाथों में निर्माण के औजार हैं बस्तर में स्थायी शांति और विकास का नया अध्याय

सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं को मिला राजमिस्त्री प्रशिक्षण, 280 से अधिक हुए आत्मनिर्भर

सुकमा। कभी नक्सलवाद की हिंसा से प्रभावित रहा सुकमा जिला आज शांति, विश्वास और विकास की नई कहानी लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे पुनर्वास अभियान के तहत युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के संयुक्त प्रयास से पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में 25 आत्मसमर्पित युवा, जिनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

280 से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण

जिला प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये युवा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में योगदान देकर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के दूरस्थ और विकास से वंचित क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्रियों की कमी को भी दूर कर रही है। इससे अधूरे आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गति मिल रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

कोंटा विकासखंड के अरलमपल्ली निवासी हूंगी सोड़ी ने बताया कि पहले जीवन अनिश्चितताओं और कठिनाइयों से भरा हुआ था, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित आवास, भोजन और सम्मानजनक जीवन के साथ रोजगार का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राजमिस्त्री का प्रशिक्षण प्राप्त कर वे अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम बनेंगे। इसी तरह जगरगुंडा क्षेत्र के मंडीमरका निवासी पदम रैनू ने भी पुनर्वास योजना की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की पहल ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। अब वे कौशल सीखकर सम्मानजनक जीवन जीने और परिवार का बेहतर भविष्य बनाने की ओर अग्रसर हैं।

शांति और विकास का मॉडल बन रहा सुकमा

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि आत्मसमर्पण का वास्तविक उद्देश्य केवल हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि पुनर्वासित युवाओं को स्थायी रोजगार और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी हैं। इससे जिले में शांति और विकास की मजबूत नींव तैयार हो रही है।

बदलाव की नई तस्वीर

सुकमा में चल रहा यह पुनर्वास मॉडल साबित कर रहा है कि सही मार्गदर्शन, संवेदनशील प्रशासन और रोजगार के अवसर मिलने पर भटके हुए युवा भी समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कभी जिन हाथों में बंदूक थी, आज उन्हीं हाथों में निर्माण के औजार हैं और भविष्य के सुनहरे सपने हैं। यह पहल न केवल आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति और विकास का नया अध्याय भी लिख रही है।

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बस्तर संवाददाता

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