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लोक जीवन 10 अगस्त 2026 2 मिनट का पठन 4 दिन पहले

राष्ट्रपति के ‘एट होम’ कार्यक्रम में बस्तर का हुनर, 50 शिल्पकारों ने तैयार की खास निमंत्रण किट

अपडेट किया गया: 4 दिन पहले

राष्ट्रपति के ‘एट होम’ कार्यक्रम में बस्तर का हुनर, 50 शिल्पकारों ने तैयार की खास निमंत्रण किट

राष्ट्रपति के ‘एट होम’ कार्यक्रम की खास पहचान बनेगा बस्तर का हुनर, 50 शिल्पकारों ने तैयार की निमंत्रण किट

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘एट होम’ कार्यक्रम की निमंत्रण किट इस बार बस्तर की पारंपरिक कला और शिल्पकौशल की खास झलक पेश करेगी। इस अनूठी हस्तनिर्मित किट को तैयार करने वाली करीब 130 शिल्पकारों की टीम में कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लगभग 50 शिल्पकार शामिल हैं।

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) के निदेशक अशोक मंडल के अनुसार, बस्तर के इन शिल्पकारों की भागीदारी समावेशी विकास और आजीविका के अवसरों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। यह पहल उन क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने का उदाहरण भी है, जहां लंबे समय तक हिंसा और विकास की चुनौतियां बनी रही थीं।

बस्तर की ढोकरा और पिटवा कला को मिली जगह

राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाने वाली इस विशेष निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध ढोकरा ढलाई कला और पिटवा शिल्पकला को शामिल किया गया है। ढोकरा भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक है, वहीं लोहे से तैयार की जाने वाली पिटवा कला का इस्तेमाल किट के डिस्प्ले फ्रेम और घंटी जैसे उत्पादों में किया गया है।

किट में बस्तर की समुदाय आधारित परंपराओं और पवित्र उपवनों के संरक्षण की अवधारणा को भी प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से क्षेत्र की पारंपरिक ज्ञान परंपरा और प्रकृति के साथ जुड़ी जीवनशैली को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया गया है।

तीन महीने से अधिक समय में तैयार हुई किट

इस पूरी किट को तैयार करने में तीन महीने से अधिक का समय लगा। शिल्पकारों ने NID के शिक्षकों, डिजाइनरों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर पारंपरिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का इस्तेमाल किया।

पूरी तरह हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल यह किट भारत की कलात्मक विविधता, पारंपरिक शिल्प और सतत विकास की सोच को एक साथ प्रस्तुत करती है।

चार राज्यों की संस्कृति का संगम

निमंत्रण किट में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी शामिल किया गया है। इन राज्यों की लोक कला और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परंपराओं के माध्यम से समुदाय, प्रकृति और रचनात्मकता के संबंध को प्रदर्शित किया गया है।

इस किट की खास बात यह है कि यह केवल एक निमंत्रण सामग्री नहीं, बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकार समुदायों के योगदान को सम्मान देने का माध्यम बन गई है।

बस्तर के शिल्पकारों के लिए राष्ट्रीय पहचान

बस्तर के करीब 50 शिल्पकारों का राष्ट्रपति के ‘एट होम’ कार्यक्रम की निमंत्रण किट तैयार करने में शामिल होना क्षेत्र के पारंपरिक हुनर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सदियों पुरानी ढोकरा और पिटवा जैसी कलाओं को राष्ट्रपति भवन से जुड़े इस प्रतिष्ठित आयोजन में स्थान मिलने से बस्तर की कला को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

यह पहल दिखाती है कि बस्तर का हुनर अब केवल जंगल और गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंचों तक अपनी पहचान बना रहा है।

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बस्तर संवाददाता

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