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लोक जीवन 8 सितंबर 2026 4 मिनट का पठन 5 दिन पहले

Rajgarh Ajnar River Cleanup: Bittu Tabahi की सफाई पर क्यों उठे सवाल?

अपडेट किया गया: 4 दिन पहले

Rajgarh Ajnar River Cleanup: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में Ajnar River Cleanup इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

Rajgarh Ajnar River Cleanup: Bittu Tabahi की सफाई पर क्यों उठे सवाल?

Rajgarh Ajnar River Cleanup: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में Ajnar River Cleanup इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर Bittu Tabahi के नाम से मशहूर सुरेंद्र सिंह चौधरी की नदी सफाई की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें देशभर से सराहना मिली। लेकिन अब इस कहानी का दूसरा पक्ष भी सामने आया है।

Ajnar River Ground Report में स्थानीय लोगों और अजनार बचाओ समिति की ओर से नदी की सफाई को लेकर अलग दावा किया गया है। समिति का कहना है कि अजनार नदी की सफाई का काम केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं था, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों, स्वयंसेवकों और नगरपालिका की भूमिका भी रही है।

कौन हैं Bittu Tabahi?

ब्यावरा निवासी सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर Bittu Tabahi के नाम से जाना जाता है, B.Sc के छात्र हैं। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी की स्थिति देखकर उसकी सफाई शुरू करने का फैसला किया था।

नदी में प्लास्टिक, बोतलें, जलकुंभी, गाद और अन्य कचरा जमा था। इसके बाद सुरेंद्र नदी में उतरकर सफाई करने लगे। शुरुआत में उनके साथ कुछ दोस्त भी जुड़े, लेकिन बाद में उन्होंने काफी समय अकेले काम करते हुए बिताया। उन्होंने सफाई के दौरान वीडियो और पहले-बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं।

अपनी जेब से खर्च किए पैसे

रिपोर्ट के अनुसार, Bittu Tabahi का कहना है कि उन्होंने नदी सफाई अभियान में अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च किए। सफाई के लिए जरूरी सामान और डस्टबिन जैसी चीजों पर उन्होंने पैसा लगाया। उन्होंने पूजा सामग्री से निकलने वाले कचरे को अलग करने और उसे कंपोस्ट में बदलने की कोशिश भी की। प्रदूषित पानी में काम करने के दौरान उनके हाथों में संक्रमण की समस्या भी हुई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सफाई जारी रखी।

फिर विवाद कहां से शुरू हुआ?

सोशल मीडिया पर Bittu Tabahi की कहानी वायरल होने के बाद उन्हें काफी लोकप्रियता मिली। लेकिन इसके साथ ही कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या Ajnar River Cleanup वास्तव में केवल एक व्यक्ति ने किया था?

यहीं से कहानी में नया मोड़ आया। अजनार बचाओ समिति और स्थानीय लोगों ने दावा किया कि नदी की सफाई लंबे समय से सामूहिक प्रयासों के जरिए होती रही है। समिति के अनुसार, वर्ष 2016 से समिति और नगरपालिका मिलकर नदी की सफाई के अभियान चलाते रहे हैं। समिति का यह भी कहना है कि Bittu Tabahi स्वयं समिति से जुड़े रहे हैं और सफाई अभियानों में सहयोग करते रहे हैं। इसलिए पूरी सफाई का श्रेय केवल एक व्यक्ति को देना सही तस्वीर नहीं दिखाता।

क्या Bittu Tabahi का योगदान गलत है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

स्थानीय समिति की ओर से सामूहिक सफाई का दावा किए जाने का मतलब यह नहीं है कि Bittu Tabahi का व्यक्तिगत प्रयास महत्वहीन हो जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने लंबे समय तक नदी में उतरकर कचरा हटाने का काम किया और इस मुद्दे को सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया।

उनकी तस्वीरों और वीडियो के वायरल होने के बाद अजनार नदी की स्थिति को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हुई। नगरपालिका की ओर से भी नदी और उससे जुड़े प्रदूषण के मुद्दे पर कार्रवाई की बात सामने आई है।

अजनार नदी का बड़ा सवाल: सफाई के बाद क्या?

Ajnar River Cleanup की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ यह नहीं है कि नदी की सफाई किसने की।

बड़ा सवाल यह है कि नदी में दोबारा कचरा और गंदा पानी न पहुंचे, इसके लिए स्थायी व्यवस्था क्या होगी?

रिपोर्टों के मुताबिक, अजनार नदी में कई बड़े नालों से पानी पहुंचने की समस्या है। नगरपालिका की ओर से Sewage Treatment Plant यानी STP के प्रस्ताव की जानकारी भी सामने आई है। एक रिपोर्ट में इसकी अनुमानित लागत करीब ₹14.77 करोड़ बताई गई है।

इससे साफ है कि केवल नदी से कचरा निकालना पर्याप्त नहीं होगा। अगर गंदा पानी और कचरा लगातार नदी में पहुंचता रहा तो कुछ समय बाद वही समस्या दोबारा खड़ी हो सकती है।

सोशल मीडिया ने बदल दी नदी की कहानी

Bittu Tabahi की कहानी यह भी दिखाती है कि आज सोशल मीडिया किसी स्थानीय पर्यावरणीय समस्या को कितनी तेजी से राष्ट्रीय चर्चा में ला सकता है।

अजनार नदी की सफाई के वीडियो और तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद कई चर्चित लोगों ने उनके प्रयास की सराहना की। वहीं, उनकी कहानी को लेकर उठे सवालों ने यह बहस भी शुरू कर दी कि किसी सामाजिक या पर्यावरणीय अभियान में व्यक्तिगत योगदान और सामूहिक योगदान को किस तरह देखा जाना चाहिए।

असली जीत नदी की होनी चाहिए

Rajgarh Ajnar River Cleanup की कहानी में एक तरफ Bittu Tabahi की व्यक्तिगत मेहनत और दूसरी तरफ स्थानीय समिति के सामूहिक प्रयास का दावा है।

इस विवाद से अलग एक बात स्पष्ट है—अजनार नदी की सफाई और संरक्षण अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। यदि इस जागरूकता को स्थायी व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट और स्थानीय लोगों की भागीदारी से जोड़ा जाए, तो इसका सबसे बड़ा फायदा अजनार नदी और उसके आसपास रहने वाले लोगों को मिलेगा।

आखिरकार सवाल यह नहीं होना चाहिए कि नदी को साफ करने का श्रेय किसे मिले। सवाल यह होना चाहिए कि अजनार नदी दोबारा प्रदूषित न हो, इसके लिए स्थायी समाधान कब और कैसे लागू होगा।

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बस्तर संवाददाता

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