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छत्तीसगढ़ खबर 2 जून 2026 2 मिनट का पठन 2 जून 2026

सुकमा के गोगुण्डा में स्वास्थ्य सेवाओं की नई रोशनी, 10 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन

दहशत का अंधेरा हटा, गोगुण्डा के ग्रामीणों को मिली नई रोशनी: 10 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन

सुकमा के गोगुण्डा में स्वास्थ्य सेवाओं की नई रोशनी, 10 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन

सुकमा जिले के दूरस्थ और कभी नक्सल प्रभावित रहे गोगुण्डा गांव में स्वास्थ्य सेवाओं ने नई उम्मीद जगाई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में जिला चिकित्सालय सुकमा द्वारा 10 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे ग्रामीणों को नई दृष्टि और बेहतर जीवन का अवसर मिला है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर घर-घर सर्वे किया और मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की पहचान की। इसके बाद मरीजों को विशेष वाहनों के माध्यम से जिला चिकित्सालय सुकमा लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका निःशुल्क ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के बाद मरीजों को अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उन्हें सुरक्षित उनके गांव वापस पहुंचाया गया। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को फल वितरित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जागरूकता अभियान भी

स्वास्थ्य विभाग ने डिस्चार्ज हुए मरीजों और उनके परिजनों से अपील की कि वे अपने आसपास के अन्य मोतियाबिंद पीड़ित लोगों को भी उपचार के लिए प्रेरित करें। यह पहल अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का रूप ले रही है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक उपचार की सुविधा पहुंच सके।

सुकमा की बदलती तस्वीर का उदाहरण

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि कभी विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रहे सुदूर अंचलों तक अब शासन की योजनाएं प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं। नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हुआ है।

उन्होंने कहा कि गोगुण्डा जैसे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच यह दर्शाती है कि सुकमा अब बदलाव और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।

यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवा वितरण का उदाहरण है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों में सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता का भी प्रमाण है।

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बस्तर संवाददाता

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