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छत्तीसगढ़ खबर 22 जुलाई 2026 2 मिनट का पठन 1 दिन पहले

अटैच शिक्षकों और कर्मचारियों को भेजा जाएगा मूल पदस्थापना पर

अपडेट किया गया: 14 घंटे पहले

अटैच शिक्षकों और कर्मचारियों को भेजा जाएगा मूल पदस्थापना पर

शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई: अटैच शिक्षकों, लिपिक और प्यून की होगी मूल पदस्थापना पर वापसी

रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग ने वर्षों से कार्यालयों में अटैच होकर कार्य कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बस्तर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी ने 24 कर्मचारियों सहित प्राचार्य और व्याख्याताओं को कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए हैं। वहीं रायपुर में भी स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टर को पत्र भेजकर सभी अटैचमेंट समाप्त करने को कहा है।

बस्तर में 24 कर्मचारी किए गए कार्यमुक्त

जिला शिक्षा अधिकारी बलीराम बघेल के निर्देश पर लंबे समय से जिला शिक्षा कार्यालय, समग्र शिक्षा कार्यालय और विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजा गया है। इनमें प्राचार्य, व्याख्याता, लिपिक और भृत्य (प्यून) भी शामिल हैं।

इन कर्मचारियों की नियुक्ति विद्यालयों में विद्यार्थियों और शैक्षणिक व्यवस्था के लिए हुई थी, लेकिन वे वर्षों से प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत थे। अब विभाग ने उन्हें उनके मूल दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं।

रायपुर में भी अटैचमेंट समाप्त करने की तैयारी

स्कूल शिक्षा विभाग ने रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर अटैचमेंट समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इसके साथ ही जिला शिक्षा कार्यालयों से भी अटैच कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। जानकारी के अनुसार, अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।

1 जुलाई से ऑनलाइन उपस्थिति होगी अनिवार्य

शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। अब कर्मचारी केवल उसी संस्थान से उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे, जहां उनकी मूल पदस्थापना है।

यदि कोई कर्मचारी अटैचमेंट वाले कार्यालय में कार्य करता पाया गया तो उसकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होगी और वेतन भुगतान भी प्रभावित हो सकता है। अवकाश आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा रही है।

स्कूलों में बढ़ेगी कर्मचारियों की उपलब्धता

विभाग का मानना है कि इस फैसले से स्कूलों में शिक्षकों, लिपिकों और भृत्यों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे विद्यालयों का दैनिक संचालन बेहतर होगा और विद्यार्थियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की वापसी से स्कूलों में रिक्त पदों की समस्या भी कुछ हद तक कम होगी।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर

शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई विद्यालयों में मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति स्कूलों के लिए हुई है, वे वहीं अपनी सेवाएं दें।

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बस्तर संवाददाता

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