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छत्तीसगढ़ समाचार 12 सितंबर 2026 4 मिनट का पठन 1 दिन पहले

छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव- CG bhuiyan

अपडेट किया गया: 12 घंटे पहले

Chhattisgarh Land Use Rules: ‘Negative List’ से आसान होंगे नियम; CM साय बोले- बदलती जरूरतों के अनुरूप होगा विकास

छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव- CG bhuiyan


रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को अधिक सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए ‘Negative List’ आधारित व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लगातार प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियम एवं प्रक्रियाएं सरल हों और प्रदेश में विकास के अनुकूल वातावरण तैयार हो। प्रस्तावित संशोधन से बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिल सकती है।

क्या है ‘Negative List’ आधारित व्यवस्था?

प्रस्तावित व्यवस्था में किसी भूमि उपयोग श्रेणी के लिए हर अनुमत गतिविधि की लंबी सूची बनाने के बजाय प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची निर्धारित की जाएगी।

यानी जो गतिविधि संबंधित भूमि उपयोग की Negative List में शामिल नहीं होगी, उसे अनुमत माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी और नई तथा उभरती गतिविधियों के लिए भी अवसर बढ़ेंगे।

मंत्री ओपी चौधरी ने क्या कहा?

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है।

Negative List व्यवस्था के जरिए प्रतिबंधित गतिविधियां पहले से स्पष्ट रहेंगी, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे बदलती आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।

आवासीय क्षेत्रों में किन गतिविधियों पर रोक का प्रस्ताव?

प्रस्ताव में आवासीय भूमि उपयोग के लिए कई ऐसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रावधान है, जो सुरक्षा, पर्यावरण या आसपास के निवासियों के लिए असंगत मानी जाती हैं।

इनमें प्रमुख रूप से प्रदूषणकारी उद्योग, बड़े भंडारण, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान और खनन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

वाणिज्यिक क्षेत्रों में भी स्पष्ट होगी व्यवस्था

वाणिज्यिक भूमि उपयोग के लिए प्रस्तावित Negative List में विभिन्न श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रावधान है।

इसके अलावा पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को भी निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।

औद्योगिक भूमि उपयोग में क्या बदलाव होगा?

औद्योगिक भूमि उपयोग के लिए भी असंगत गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, कुछ प्रकार के छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण तथा गैस गोदाम जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में निर्धारित भूमि उपयोग और अन्य गतिविधियों के बीच बेहतर नियोजन बनाए रखना है।

कृषि भूमि के लिए भी अलग Negative List

कृषि भूमि उपयोग के लिए भी अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची प्रस्तावित की गई है। इसमें बड़े वाणिज्यिक परिसरों, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योगों, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाओं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित रखने का प्रावधान है।

वहीं सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन और आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक और अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

नई और बदलती जरूरतों के लिए खुल सकता है रास्ता

सरकार का मानना है कि अर्थव्यवस्था और तकनीक के बदलते दौर में नई सेवाएं, व्यवसाय और संस्थाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में हर नई गतिविधि को पहले से अनुमति वाली सूची में शामिल करने की व्यवस्था कई बार नियामकीय अड़चन पैदा कर सकती है।

Negative List आधारित व्यवस्था में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट किया जाएगा। इससे भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक लचीली व्यवस्था उपलब्ध हो सकती है।

नागरिकों से मांगे गए आपत्ति और सुझाव

प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों की अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?

प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य भूमि उपयोग से जुड़ी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है। यदि संशोधन अंतिम रूप से लागू होता है, तो अलग-अलग भूमि उपयोग क्षेत्रों में कौन-सी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं, यह अधिक स्पष्ट हो सकेगा।

सरकार के अनुसार इससे अनुपालन बोझ कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और आवास एवं अधोसंरचना विकास को गति देने में मदद मिल सकती है।



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