राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का गौरव, मांझी-चालकी और बस्तर पंडुम के विजेताओं का हुआ विशेष सम्मान
रायपुर, 31 जुलाई 2026। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था ने राष्ट्रपति भवन में अपनी अनूठी पहचान दर्ज कराई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, मांझी-चालकी, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति और परंपराओं का विशेष सम्मान हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी और पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के लिए विशेष भोज का आयोजन किया। कार्यक्रम का सबसे आत्मीय क्षण तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया।

राष्ट्रपति ने जाना बस्तर की संस्कृति का महत्व
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद किया और बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था तथा मांझी-चालकी प्रणाली के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत देश की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।
उन्होंने बस्तर पंडुम को जनजातीय परंपराओं और लोककलाओं का जीवंत उत्सव बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं।

बस्तर दशहरा और पंडुम में शामिल होने की इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने बस्तर दशहरा की परंपराओं और भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा का उल्लेख करते हुए बस्तर से अपने आत्मीय संबंध की बात कही।
राष्ट्रपति ने पारंपरिक मांझी व्यवस्था की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की यह परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार है।
शांति और विकास की ओर बढ़ रहा बस्तर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी से बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को उन्होंने सकारात्मक बदलाव बताया।
उन्होंने मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच सेतु के रूप में काम कर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अमित शाह बोले- पहली बार दिखा ऐसा सांस्कृतिक वैभव
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे कई अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतने बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने बताया पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह मुलाकात पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत को सम्मान मिलना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बस्तर आगमन से जनजातीय समाज का उत्साह बढ़ेगा और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी।
राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की कलाकृति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।
यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, त्याग, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। लोकमान्यता के अनुसार अकाल के कठिन दौर में झिटकू और मिटकी ने प्रेम और समर्पण की मिसाल कायम की थी। बस्तर में आज भी उन्हें श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों और जानकारियों से परिचित हुआ।