नक्सलमुक्त बस्तर: सुरक्षा और विकास का नया अध्याय
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद, अब प्रशासन और सुरक्षा बलों का मुख्य केंद्र क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और जन-कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना है।
प्रमुख घटनाक्रम:
बारूदी सुरंगों (IED) की सफाई: सुरक्षा बल माओवादियों द्वारा जंगलों और अंतर-राज्यीय सीमाओं पर लगाए गए विस्फोटक उपकरणों को हटाने के लिए व्यापक अभियान चला रहे हैं ।
बरामदगी के आंकड़े: 2024 से अब तक 1800 से अधिक आईईडी (IED) का पता लगाया जा चुका है। वहीं, अप्रैल 2026 में ही सुरक्षा बलों ने 100 से अधिक विस्फोटक बरामद कर उन्हें सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया है ।
तकनीकी का उपयोग: बस्तर रेंज के आईजी सुंदर राज पी ने बताया कि इन विस्फोटकों को खोजने और डिफ्यूज करने के लिए बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड, कैनाइन (डॉग) स्क्वाड और अत्याधुनिक तकनीकों की मदद ली जा रही है ।
विकास और जनकल्याण पर फोकस: क्षेत्र में सुरक्षा के साथ-साथ सरकार का विशेष ध्यान अब सर्वांगीण विकास पर है
शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा: हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा इस नई पहल का शुभारंभ किया गया है।
इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट: पुराने सुरक्षा कैंपों को अब 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ स्थानीय निवासियों को सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ सीधे प्राप्त हो सकेगा ।
आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास और क्षेत्र को पूर्णतः विस्फोटक मुक्त बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन निरंतर प्रयासरत हैं ।