जगदलपुर, 3 जुलाई। मानसून की पहली बारिश के साथ बस्तर में खेती-किसानी का दौर शुरू हो चुका है। किसान खेतों में खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच बस्तर संसदीय क्षेत्र से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां बस्तर के सांसद महेश कश्यप अपने खेतों में एक सामान्य किसान की तरह कृषि कार्य करते नजर आए।
सांसद महेश कश्यप का परिवार पीढ़ियों से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। सांसद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पारंपरिक कृषि संस्कृति को नहीं छोड़ा। आज भी वे अपने परिवार के साथ खेतों में उतरकर जोताई, बुवाई, रोपाई और फसल कटाई जैसे कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
ऐसे समय में जब जनप्रतिनिधियों को अक्सर वीआईपी संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है, महेश कश्यप का खेतों में किसानों के साथ काम करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका यह प्रयास खेती से जुड़े लोगों के प्रति सम्मान और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि "किसानी मेरा मूल आधार है और मिट्टी से मेरा जुड़ाव ही मेरी असली ताकत है। पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन अपने मूल कार्य और अपनी पहचान को कभी नहीं भूलना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि बस्तर के किसानों की खुशहाली और क्षेत्र का समग्र विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए स्वयं खेतों से जुड़े रहना जरूरी है।
मानसून के आगमन के साथ खेतों में सांसद की मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।