Mahasamund Latest News:- [Rss] राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रांशीय घोष वर्ग का समापन रविवार को स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हुआ। शिविर के अंतिम दिन स्वयंसेवकों ने एक से बढकर एक से ओत-प्रोत सुमधुर और राष्ट्रभक्ति से ओत रचनाओं व गीतों की प्रस्तुति दी।
समापन समारोह की अध्यक्षता महासमुंद जिला राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश जैन ने की और जिला संघ चालक महेश चंद्राकर बतौर अतिथि शामिल हुए। मुख्य वक्ता सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचार पद्धति और कार्य पर विस्तार से जानकारी दी।
सामूहिक रूप से वाद्य यंत्रों पर रचनाओं का प्रदर्शन करते आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रकाश डाला। कहा कि संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करना है। ईश्वर ने हमें मानव जन्म दिया है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए। हमारा मनुष्य जन्य इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। मां भारती ने हमेशा महान संतों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। हमें विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन भी उन्हीं महामानवों की तरह सार्थक बने।
उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक संगीत मनुष्य के जीवन में अद्भुत ऊर्जा भरता है। संगीत का नाम सुनते ही हमारे देवी. देवताओं के हाथों में भी वाद्य यंत्र हैं। जो यह दर्शाते हैं कि संगीत जीवन को मधुर बनाता है। संगीत मन और बुद्धि को शुद्ध कर आनंदित करता है। स्वानी विवेकानंद, तानसेन और मीराबाई ने संगीत को ही अपना माध्यम बनाया था। संगीत से भक्ति, कल्याण, वीरता और शांति के भाव पैदा होते हैं। यह लोगों को आपस में जोडने का काम करता है और तनाव तथा चिंता खत्म करता है।
रविवार शाम ठीक 6 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे। पूर्ण अनुशासन और तालबद्धता के साथ जब स्वयंसेवकों ने कदमताल करते हुए वाद्यों की प्रस्तुति दी। इस प्रांतीय शिविर में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से चयनित 110 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण को सफल बनाने में 18 प्रशिक्षक और 40 व्यवस्थापक स्वयंसेवक भी जुटे रहे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 100 वर्षों की यात्रा सरल नहीं बल्कि बेहद कठिन रही है। अनेक कष्ट सहते हुए भी स्वयंसेवकों ने कार्य जारी रखा। जिसके परिणाम स्वरुप आज देश भर में 90 हजार से अधिक शाखाएं लग रही हैं। शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वादन का कड़ा अभ्यास कराया गया। समापन समारोह में बांसुरी, शंख, आनक, ड्रम और साइड ड्रम जैसे विभिन वाद्य यंत्रों की शानदार प्रस्तुति हुई।