दंतेवाड़ा। कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे कोदो, कुटकी और मड़िया (रागी) आज दुनिया भर में सुपर फूड के रूप में पहचान बना चुके हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ये मोटे अनाज न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले में सरकारी कृषि नीतियों और बढ़ते बाजार की मांग के कारण मिलेट्स की खेती तेजी से विस्तार कर रही है।
स्वास्थ्य का खजाना हैं मिलेट्स
आधुनिक जीवनशैली और बदलती खान-पान की आदतों के कारण मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में कोदो, कुटकी और मड़िया जैसे मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आए हैं। इन अनाजों में कैल्शियम, आयरन, फाइबर और कई आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ग्लूटेन मुक्त होने के कारण ये आसानी से पच जाते हैं और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मिलेट्स का नियमित सेवन वजन नियंत्रण, हड्डियों की मजबूती और ब्लड शुगर संतुलित रखने में मददगार साबित होता है।
दंतेवाड़ा में बढ़ रही मिलेट्स की खेती
दंतेवाड़ा के किसान वर्षों से पारंपरिक रूप से कोदो, कुटकी और मड़िया की खेती करते आ रहे हैं। हालांकि पहले इनके पोषण और बाजार मूल्य को लेकर जागरूकता सीमित थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। साथ ही इन फसलों के लिए समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने से किसानों का रुझान भी तेजी से बढ़ा है।
युवा किसान बन रहे प्रेरणा
जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के युवा किसान दिलीप मरकाम और हलदर हेमला ने कृषि उन्नति योजना के तहत कोदो-कुटकी की खेती कर उल्लेखनीय लाभ अर्जित किया है। इन किसानों की सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और क्षेत्र में मिलेट्स की खेती को नई दिशा दे रही है।
स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों का माध्यम
मिलेट्स केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का भी माध्यम बन रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण अब ये अनाज घरों, होटलों और रेस्टोरेंट के मेन्यू में भी जगह बना रहे हैं। दंतेवाड़ा में बढ़ती मिलेट्स खेती यह साबित कर रही है कि पारंपरिक कृषि और आधुनिक बाजार की जरूरतों का समन्वय किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।