छिपली की दीदियों का कमाल: बकरी पालन से बढ़ी आय, आत्मविश्वास से मजबूत हुई पहचान
9 अगस्त 2026। जब मेहनत के साथ एकजुटता और सही मार्गदर्शन जुड़ जाए, तो छोटे संसाधनों से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम छिपली की स्वावलंबी महिला स्व-सहायता समूह ने इसे सच साबित कर दिखाया है। कभी सीमित साधनों के साथ आजीविका शुरू करने वाली समूह की महिलाएं आज बकरी पालन से लेकर मिनी राइस मिल, खेती और कैंटीन संचालन जैसी कई गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
चुनौतियों से शुरू हुआ सफर
समूह की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश नंदनी साहू बताती हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी। महिलाओं को एकजुट करना, आपसी विश्वास कायम करना और सामूहिक रूप से काम करने की आदत विकसित करना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। लगातार प्रयासों से समूह मजबूत हुआ और महिलाओं ने बकरी पालन को अपनी प्रमुख आजीविका गतिविधि के रूप में अपनाया।
शुरुआती दौर में कभी लाभ तो कभी नुकसान का सामना भी करना पड़ा, लेकिन महिलाओं ने हिम्मत नहीं छोड़ी। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम को बेहतर किया और इसका विस्तार किया।
हर दीदी की आय 8 से 10 हजार रुपये तक
आज समूह की प्रत्येक महिला लगभग 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रही है। बकरी पालन में बेहतर प्रबंधन, पशुओं की उचित देखभाल, विभागीय मार्गदर्शन और सामूहिक निर्णयों ने समूह को मजबूत आधार दिया है।
बकरी पालन अब केवल आय का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता का माध्यम भी बन गया है।
बकरी पालन से आगे, कई आय के रास्ते
छिपली की महिलाओं ने अपनी आजीविका को सिर्फ बकरी पालन तक सीमित नहीं रखा। समूह द्वारा कई अलग-अलग गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें फलदार वृक्षों की खेती, दलहन-तिलहन उत्पादन, मखाना उत्पादन के लिए तालाब की तैयारी, बकरी एवं गाय पालन से दुग्ध उत्पादन, मिनी राइस मिल और कैंटीन संचालन शामिल हैं।
आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने से समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत आधार मिला है।
आत्मविश्वास बना सबसे बड़ी पूंजी
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि छिपली की महिलाओं ने सामूहिकता, मेहनत और नवाचार के जरिए साबित किया है कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं अपनी आजीविका को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं।
जिला प्रशासन की ओर से ऐसे समूहों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार से जोड़ने और विभागीय सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो सके।
सम्मान ने बढ़ाया हौसला
समूह की उपलब्धियों को व्यापक पहचान भी मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों सम्मानित होने का अवसर समूह की महिलाओं के लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। यह सम्मान उनके संघर्ष, मेहनत और सामूहिक प्रयासों की पहचान बना।
दुर्गेश नंदनी साहू कहती हैं कि शुरुआत में कई बार लाभ हुआ तो कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन समूह की महिलाओं ने साथ मिलकर आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। अधिकारियों और पशुपालन विभाग से मिले सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
दूसरी महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
छिपली की महिलाओं की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं हैं, यदि मेहनत, एकजुटता और सीखने की इच्छा बनी रहे। बकरी पालन से शुरू हुआ यह सफर आज कई तरह की आजीविका गतिविधियों तक पहुंच चुका है।
आज छिपली की ये महिलाएं केवल अपनी आय नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण, सामूहिक उद्यम और बहुआयामी आजीविका का प्रेरक मॉडल भी तैयार कर रही हैं।