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कृषि जगत 24 जून 2026 2 मिनट का पठन 6 दिन पहले

आधुनिक खेती से सालभर में 7 लाख रुपये से अधिक की आय

अपडेट किया गया: 5 दिन पहले

आधुनिक खेती से सालभर में 7 लाख रुपये से अधिक की आय

बीजापुर जिले के ग्राम पोलेम के किसान कन्हैया आत्रम ने आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाकर आर्थिक सफलता की नई कहानी लिखी है। कभी परंपरागत खेती तक सीमित रहने वाले कन्हैया आज शेडनेट हाउस और उन्नत बागवानी तकनीकों की मदद से बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उद्यानिकी विभाग से मिले सहयोग, अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन के बाद कन्हैया आत्रम ने अपने खेत में 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किया। इस पहल ने उनकी खेती को नई दिशा देने के साथ-साथ आय के नए अवसर भी प्रदान किए।

शेडनेट हाउस में उन्नत सब्जी उत्पादन

कन्हैया आत्रम शेडनेट हाउस में करेला, खीरा, तरोई और बरबटी जैसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। नियंत्रित वातावरण में की गई खेती से उन्हें बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ है।

इस आधुनिक खेती से उन्हें अब तक लगभग 2 लाख रुपये का उत्पादन मिला, जिसमें खेती की लागत निकालने के बाद करीब 1.80 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई है।

लाल मिर्च की खेती से मिला बड़ा लाभ

शेडनेट हाउस के साथ-साथ कन्हैया ने खुले खेत में लाल मिर्च की भी उन्नत खेती की। इस फसल से उन्हें लगभग 7 लाख रुपये का उत्पादन प्राप्त हुआ।

करीब 2 लाख रुपये की लागत के बाद उन्हें 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। इस तरह आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती ने उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

विभागीय सहयोग बना सफलता की कुंजी

कन्हैया आत्रम का कहना है कि उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रदान किए गए प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और अनुदान ने उन्हें नई खेती तकनीकों को अपनाने का आत्मविश्वास दिया। समय-समय पर मिले विशेषज्ञ मार्गदर्शन से वे बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सफल रहे।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

कन्हैया आत्रम की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

बीजापुर जैसे आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र में एक किसान की यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

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बस्तर संवाददाता

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