रायपुर। जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और सिंचाई दक्षता बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। केंद्र सरकार के Ministry of Jal Shakti ने राज्य के एम-सीएडी (Modern Command Area Development) मॉडल की सराहना करते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे अपनाने की सलाह दी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों के जल संसाधन विभागों को एक विशेष पत्र जारी किया है। पत्र में छत्तीसगढ़ द्वारा अपने संसाधनों से कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करने की प्रशंसा की गई है।
क्या है एम-सीएडी मॉडल
एम-सीएडी (Modern Command Area Development) मॉडल का उद्देश्य जलाशयों और बांधों से उपलब्ध पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। अक्सर देखा जाता है कि पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद नहरों में रिसाव, खराब संरचना और पारंपरिक व्यवस्था के कारण पानी खेतों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। इस चुनौती से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। इसके तहत:
- नहरों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- पानी की बर्बादी और रिसाव को कम किया जा रहा है।
- सिंचाई तंत्र को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाया जा रहा है।
- उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस मॉडल के माध्यम से कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे फसल उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण करने और कृषि आय में वृद्धि की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सिंचाई प्रबंधन के जरिए खेतों तक पानी की पहुंच बेहतर होने से कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया प्राथमिकता
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन और किसानों का सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पानी की हर बूंद का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है।
राष्ट्रीय स्तर पर बनी मिसाल
छत्तीसगढ़ का एम-सीएडी मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है। जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में यह मॉडल भविष्य की जल प्रबंधन रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।