जगदलपुर।De-listing- देशभर में जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों को लेकर राजधानी दिल्ली में आयोजित विशाल सांस्कृतिक समागम में अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। जनजाति सुरक्षा मंच के अनुसार 24 मई को आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग डेढ़ लाख जनजातीय समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डि-लिस्टिंग की मांग और जनजातीय हितों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखना था।
जगदलपुर के पत्रकार भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में जनजाति सुरक्षा मंच के केंद्रीय टोली प्रमुख एवं प्रांतीय संयोजक गोरखनाथ पटेल ने कहा कि यह आयोजन किसी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं था, बल्कि देशभर के 705 जनजातीय समुदायों का सांस्कृतिक समागम था। उन्होंने बताया कि बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ से लगभग 10 हजार कार्यकर्ता अपने निजी खर्च पर दिल्ली पहुंचे और कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में निकाली गई शोभायात्रा और सांस्कृतिक समागम में छत्तीसगढ़ की टोली को विशेष महत्व देते हुए प्रथम पंक्ति में स्थान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में संविधान की धारा 342 में संशोधन नहीं किए जाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। उनका कहना था कि जो लोग जनजातीय समाज से अन्य पंथ या समुदाय में शामिल हो चुके हैं, उन्हें जनजातीय वर्ग के आरक्षण और अन्य लाभ नहीं मिलने चाहिए। इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया।
पत्रवार्ता में बताया गया कि केंद्रीय गृहमंत्री की कार्यक्रम में मौजूदगी जनजातीय मुद्दों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। मंच के अनुसार गृहमंत्री ने जनजातीय समाज की संस्कृति, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
जिला संयोजक रामनाथ बघेल ने इसे जनजातीय समाज का ऐतिहासिक आयोजन बताया। प्रेसवार्ता में महादेव नाग सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।