दंतेवाड़ा। जिला कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशानुसार जिला परियोजना आजीविका महाविद्यालय सोसायटी, दंतेवाड़ा में साइबर अपराध एवं नशा मुक्ति विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आत्मसमर्पित हितग्राहियों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक शपथ ग्रहण से हुई, जिसमें थाना गीदम के उपनिरीक्षक, आजीविका महाविद्यालय के प्राचार्य, प्रशिक्षकों और प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने साइबर अपराध से सतर्क रहने और नशा मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से शपथ प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम में थाना गीदम के उपनिरीक्षक ने साइबर अपराध के बढ़ते मामलों और उनसे बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, फिशिंग, ओटीपी साझा करने के जोखिम, सोशल मीडिया धोखाधड़ी, डिजिटल भुगतान से जुड़े अपराध और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, एटीएम विवरण या ओटीपी साझा न करें। संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक मिलने पर सतर्क रहें और साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने तथा ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाएं।
कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक जीवन और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया।
आजीविका महाविद्यालय प्रबंधन ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार समय-समय पर ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता और नशा मुक्त समाज के निर्माण की भावना विकसित हो सके।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करने, नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प दोहराया।