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छत्तीसगढ़ समाचार • 13 जुलाई 2026 • 1 मिनट का पठन • 13 जुलाई 2026

नारायणपुर: करलखा गांव के तीन परिवारों के 15 सदस्यों ने अपनाया मूल धर्म

नारायणपुर: करलखा गांव के तीन परिवारों के 15 सदस्यों ने अपनाया मूल धर्म

नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत करलखा में तीन परिवारों के 15 सदस्यों ने अपने मूल धर्म और पारंपरिक रीति-रिवाजों को पुनः अपनाने की घोषणा की। यह निर्णय गांव के जिमिदारीन माता मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया, जहां ग्रामीणों और पारंपरिक नेतृत्व की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराया गया।

जानकारी के अनुसार, बसंती आमडे, सुलोचना बघेल और रजमन सलाम के परिवारों सहित कुल 15 लोगों ने स्वेच्छा से मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया। बैठक में गांव के पटेल और गायता की उपस्थिति में इन परिवारों ने गांव की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने का संकल्प लिया।

धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुआ स्वागत

घोषणा के बाद जिमिदारीन माता मंदिर परिसर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों और वरिष्ठजनों ने परिवारों का स्वागत करते हुए सामाजिक सौहार्द, एकता और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। ग्रामीणों ने इस निर्णय को गांव की सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ा कदम बताया।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में जगदलपुर के नानगुर क्षेत्र में भी एक परिवार के सात सदस्यों ने ईसाई पंथ छोड़कर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सनातन धर्म अपनाने की घोषणा की थी। हालांकि, इस तरह के मामलों में संबंधित पक्षों की स्वैच्छिक सहमति और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने, बदलने या छोड़ने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

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बस्तर संवाददाता

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