बीजापुर नक्सली होने के आरोप में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की रिहाई की मांग को लेकर बीजापुर से परिजनों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को रायपुर के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी कर रहे हैं। परिवारजन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृहमंत्री विजय शर्मा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराएंगे। प्रतिनिधिमंडल की मुख्य मांग है कि जिन निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों को नक्सली होने के आरोप में वर्षों से जेलों में बंद रखा गया है, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें शीघ्र रिहा किया जाए। परिजनों का कहना है कि जिस प्रकार हार्डकोर नक्सलियों से जुड़े कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लिए गए हैं, उसी तरह निर्दोष और गरीब आदिवासियों के मामलों की भी संवेदनशीलता से जांच होनी चाहिए। इससे पहले 9 जुलाई को बीजापुर जिला मुख्यालय में जेलों में बंद ग्रामीणों के परिजनों और विधायक विक्रम मंडावी की बैठक हुई थी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर बीजापुर को सौंपा गया, जिसमें मामलों की समीक्षा कर न्याय दिलाने की मांग की गई। परिजनों का आरोप है कि कई ग्रामीणों को पर्याप्त साक्ष्यों के बिना नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया और वे लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे परिवार आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में बदलते हालात और शांति के प्रयासों के बीच अब निर्दोष लोगों के मामलों की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के हितों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा है।
प्रतिनिधिमंडल में सोनाराम बारसा, शांति कोरसा, रोहिता ताती, विनित इरपा, वामन कड़ती, सेवंती गोटा, मुन्ना ओयाम, भीमा मड़कम, विकास अवलम, मंगेस बारसे, बीजू लेकाम, महेश रेंगा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं।