जगदलपुर। बस्तर के युवाओं के लिए खेल अब केवल फिटनेस या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि करियर और नई पहचान का रास्ता बनता जा रहा है। जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस की संयुक्त पहल से इन्द्रावती नदी की धाराओं में युवाओं को ओलंपिक खेल क्याकिंग और कैनोइंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों में भर्ती की तैयारी में भी मददगार साबित हो रही है।
कलेक्टर और एसपी की पहल से मिला नया मंच
बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के आह्वान पर लालबाग स्थित प्रशिक्षण केंद्र में बस्तर फाइटर, सेना भर्ती, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की तैयारी कर रहे युवा बड़ी संख्या में इस प्रशिक्षण से जुड़ रहे हैं।
इन्द्रावती नदी के पुराने पुल के नीचे प्रतिदिन आयोजित प्रशिक्षण में युवाओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। प्राकृतिक जलधारा में अभ्यास के कारण खिलाड़ियों को वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर अनुभव मिल रहा है।
ओलंपिक खेल से जुड़ रहा बस्तर
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला खेल अधिकारी सुशांत पॉल का विशेष योगदान है। वहीं क्याकिंग एवं कैनोइंग के प्रभारी डी. कोटेश्वर राव नायडू और प्रशिक्षक अशोक साहू खिलाड़ियों को जल सुरक्षा, नाव संचालन, पैडलिंग तकनीक, संतुलन और प्रतियोगी स्तर की तकनीकों का नियमित प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक संतुलन, अनुशासन और टीम भावना विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
रोजगार और खेल, दोनों में मिल रहा अवसर
प्रशासन का मानना है कि बस्तर के युवाओं में साहस, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने की स्वाभाविक क्षमता है। इन्हीं गुणों को सही दिशा देने के लिए युवाओं को ऐसे खेलों से जोड़ा जा रहा है, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की संभावनाएं हैं।
क्याकिंग और कैनोइंग जैसे ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन युवाओं को खेल कोटे के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा सकता है। यही कारण है कि सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवा भी इस प्रशिक्षण में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
'नया बस्तर, नया खेल, नई पहचान' की ओर कदम
प्रशिक्षण के दौरान बस्तर फाइटर एवं सेना भर्ती प्रभारी हेम सिंह नेगी ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें नियमित अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बस्तर में खेलों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की यह पहल अब "नया बस्तर, नया खेल, नई पहचान" के संकल्प को साकार करती दिखाई दे रही है।