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संस्कृति 25 मई 2026 2 मिनट का पठन 25 मई 2026

समाज को बांटने और कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहें - CM विष्णु देव साय

अपडेट किया गया: 25 मई 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जनजातीय समाज से अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बनाए रखने का आह्वान किया है।

समाज को बांटने और कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहें - CM विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जनजातीय समाज से अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को बनाए रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज को बांटने और कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहा जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक जनजातीय समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास नहीं हो पाया, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदाय को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज जनजातीय समाज राष्ट्र की मुख्यधारा में अपनी मजबूत भागीदारी निभा रहा है और देश के विकास में अहम योगदान दे रहा है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन कर वनवासी समाज के कल्याण को प्राथमिकता दी। आज देश की सर्वोच्च संवैधानिक जिम्मेदारी भी जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू निभा रही हैं, जो पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में केंद्र सरकार ने वनवासी समाज को अधिकार और सम्मान देने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया जाना जनजातीय वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में बड़ा कदम है।


उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना, वनधन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से आदिवासी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया है। वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज का संग्रहण और प्रसंस्करण कर स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज अपनी सरलता, प्रकृति प्रेम और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। इसलिए समाज को अपनी भाषा, लोक परंपराओं, देवी-देवताओं, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए एकजुट रहना होगा। उन्होंने कहा कि बाहरी और समाज विरोधी ताकतें संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास करती हैं, जिनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है।


उन्होंने दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर से पहुंचे लाखों लोगों की उपस्थिति ने जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को नई पहचान दी है। यह आयोजन हजारों वर्षों पुरानी जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना।


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बस्तर संवाददाता

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