बस्तर खबर
शिक्षा 12 जुलाई 2026 2 मिनट का पठन 14 घंटे पहले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीएससी नर्सिंग में 10% परसेंटाइल नियम रद्द

अपडेट किया गया: 2 घंटे पहले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीएससी नर्सिंग में 10% परसेंटाइल नियम रद्द

बीएससी नर्सिंग प्रवेश पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 10% न्यूनतम परसेंटाइल नियम रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीएससी (नर्सिंग) प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार की 10 प्रतिशत न्यूनतम परसेंटाइल अनिवार्यता वाली अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) द्वारा पात्रता में छूट दिए जाने के बाद राज्य सरकार अतिरिक्त शर्तें लागू नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि नर्सिंग शिक्षा के मानक तय करने का अधिकार केवल भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) को है। यदि परिषद किसी विशेष परिस्थिति में पात्रता नियमों में छूट देती है, तो राज्य सरकार या चिकित्सा शिक्षा विभाग उसमें संशोधन या नई पात्रता शर्त नहीं जोड़ सकते।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर नई काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर सभी रिक्त सीटों पर केवल प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

4,147 सीटें रह गई थीं खाली

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रदेश में बीएससी नर्सिंग की कुल 7,811 सीटें स्वीकृत हैं। पहले चरण की काउंसलिंग के बाद 4,147 सीटें खाली रह गई थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने भारतीय नर्सिंग परिषद से न्यूनतम परसेंटाइल की शर्त में छूट देने का अनुरोध किया था।

परिषद ने 29 दिसंबर 2025 को यह छूट प्रदान कर दी थी ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सके और खाली सीटों को भरा जा सके। लेकिन छूट मिलने के बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 10 प्रतिशत न्यूनतम परसेंटाइल की अतिरिक्त शर्त लागू कर दी, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो गए।

कोर्ट ने बताया अधिकार क्षेत्र से बाहर का निर्णय

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार का निर्णय भारतीय नर्सिंग परिषद की मंशा और अधिकार क्षेत्र के विपरीत था। परिषद का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश देना और खाली सीटों को भरना था, जबकि राज्य सरकार की अतिरिक्त शर्त ने उसी उद्देश्य को प्रभावित किया।

अदालत ने माना कि राज्य सरकार केवल परिषद के नियमों को लागू करने वाली एजेंसी है और उसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नई पात्रता शर्त लागू करने का अधिकार नहीं है।

सभी पात्र अभ्यर्थियों को मिलेगा प्रवेश का अवसर

इस फैसले के बाद अब भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान विषयों के साथ 12वीं उत्तीर्ण तथा कॉमन एंट्रेंस परीक्षा में शामिल सभी पात्र अभ्यर्थियों को केवल मेरिट सूची के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। किसी भी छात्र को 10 प्रतिशत न्यूनतम परसेंटाइल के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विलंब से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके लिए संबंधित नर्सिंग कॉलेज अतिरिक्त कक्षाएं, प्रायोगिक सत्र और लैब प्रशिक्षण आयोजित करेंगे ताकि विद्यार्थियों की निर्धारित उपस्थिति और शैक्षणिक मानकों की पूर्ति सुनिश्चित हो सके।

हाईकोर्ट के इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबे समय से खाली पड़ी नर्सिंग सीटों पर प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है।

लेखक

बस्तर संवाददाता

इस लेखक की सभी ख़बरें

और भी पढ़ें