मूल पदस्थापना स्थल पर समय पर नहीं पहुंचे तो लगेगा 'ब्रेक इन सर्विस', शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही संलग्नीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था को समाप्त करने के बाद अब शासन ने नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध 'ब्रेक इन सर्विस' (सेवा में व्यवधान) की कार्रवाई की जाएगी।
15 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार सभी संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल विद्यालय या कार्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने के साथ ऑनलाइन उपस्थिति भी दर्ज करानी थी। इसके बावजूद कई कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं पहुंचे।
बस्तर में 100 से अधिक शिक्षक और अधीक्षक अब भी नहीं पहुंचे
बस्तर जिले में इस आदेश का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार 100 से अधिक शिक्षक और अधीक्षक अब तक अपने मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके हैं। शासन की सख्ती के बाद ऐसे कर्मचारी अब वैकल्पिक उपाय तलाशने में जुटे हैं, लेकिन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार नियमों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
सभी बीईओ से मांगी गई जानकारी
लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश पर जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) से ऐसे कर्मचारियों की सूची मांगी गई है, जिन्होंने अभी तक अपने मूल विद्यालय या कार्यालय में जॉइनिंग नहीं की है।
जिला शिक्षा अधिकारी बलीराम बघेल ने बताया कि ऐसे कर्मचारियों को एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि इस अवधि के भीतर भी वे अपने मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो शासन के निर्देशानुसार उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या होता है 'ब्रेक इन सर्विस'?
'ब्रेक इन सर्विस' का अर्थ कर्मचारी की सेवा में व्यवधान माना जाना है। इसका सीधा प्रभाव कर्मचारी की सेवा अवधि, वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर पड़ सकता है। इसलिए समय पर जॉइनिंग करना सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य माना गया है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की पहल
शिक्षा विभाग का यह निर्णय संलग्नीकरण व्यवस्था को समाप्त कर स्कूलों में नियमित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता है, वहां उनकी नियमित उपस्थिति बनी रहे और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि अब शिक्षा विभाग में कार्यस्थल संबंधी नियमों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।