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छत्तीसगढ़ समाचार 30 अगस्त 2026 2 मिनट का पठन 30 अगस्त 2026

अबूझमाड़ में शांति की नई पहल: आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने DRG जवानों को बांधी राखी

अपडेट किया गया: 30 अगस्त 2026

अबूझमाड़ में शांति की नई पहल: आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने DRG जवानों को बांधी राखी


नारायणपुर, 30 अगस्त 2026। बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में बदलाव और शांति की एक नई तस्वीर सामने आई है। कभी हिंसा और भय के माहौल का हिस्सा रही, लेकिन अब आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुकी महिला माओवादियों ने रक्षाबंधन के अवसर पर नारायणपुर पुलिस के डीआरजी परिसर में जवानों और पुलिस अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी। इस पहल ने शांति, विश्वास और मानवीय रिश्तों का एक भावुक संदेश दिया।

रक्षाबंधन का यह आयोजन केवल एक पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहा। आत्मसमर्पित महिलाओं और सुरक्षा बलों के बीच बने इस आत्मीय रिश्ते ने बदलते बस्तर की एक अलग तस्वीर पेश की। जिस क्षेत्र में कभी संघर्ष और अविश्वास का माहौल था, वहीं अब संवाद और अपनत्व की भावना मजबूत होती दिखाई दे रही है।

आत्मसमर्पित बहनों ने बांधी राखी

डीआरजी परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय साबद्रा, अजय कुमार और ऐश्वर्य चंद्राकर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को राखी बांधी।

इस दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों के प्रति स्नेह एवं सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि कभी अलग रास्ते पर रही ये महिलाएं अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ रही हैं।

बंदूक से ज्यादा ताकतवर है विश्वास

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल प्रेम और भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में सम्मानजनक जीवन का अवसर देना और उनके भीतर सुरक्षा की भावना मजबूत करना पुलिस तथा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि हिंसा और संघर्ष से दूर होकर संवाद, विश्वास और अपनत्व के जरिए भी मजबूत रिश्ते बनाए जा सकते हैं।

बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर

अबूझमाड़ लंबे समय तक दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल गतिविधियों के कारण देश के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रहा है। ऐसे क्षेत्र में आत्मसमर्पण के बाद पूर्व महिला माओवादियों का सुरक्षा बलों के साथ रक्षाबंधन मनाना बदलाव की एक मानवीय तस्वीर सामने लाता है।

राखी का यह धागा केवल एक त्योहार की रस्म नहीं रहा, बल्कि मुख्यधारा में लौटे लोगों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास की नई कड़ी का प्रतीक बन गया।

नारायणपुर में मनाया गया यह रक्षाबंधन इस उम्मीद को मजबूत करता है कि अबूझमाड़ की पहचान धीरे-धीरे भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास, भाईचारे और विकास से जुड़ रही है।

एक समय जहां बंदूक का साया था, वहीं आज राखी का धागा नजर आया—यही बदलते बस्तर की सबसे बड़ी तस्वीर है।

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बस्तर संवाददाता

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