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The Bastar Roots | Chhattisgarh News
पर्यटन 17 सितंबर 2026 3 मिनट का पठन 4 घंटे पहले

इंद्रावती टाइगर रिजर्व 1 नवंबर से शुरू होगी सफारी की तैयारी

अपडेट किया गया: 1 घंटे पहले

Indravati Tiger Reserve करीब 40 साल बाद छत्तीसगढ़ का इंद्रावती टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुलने की तैयारी में है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व 1 नवंबर से शुरू होगी सफारी की तैयारी

बीजापुर। बस्तर के घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों के लिए पहचान रखने वाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब चार दशक बाद पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है। वन विभाग के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से यहां संगठित वन्यजीव पर्यटन शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। शुरुआती चरण में चुनिंदा क्षेत्रों को पर्यटन के लिए विकसित कर सफारी की सुविधा शुरू करने की योजना है।

2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला है इंद्रावती टाइगर रिजर्व

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब 2,799 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें लगभग 1,258 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1,540 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। रिजर्व को वर्ष 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत शामिल किया गया था। लंबे समय तक क्षेत्र की सुरक्षा परिस्थितियों के कारण रिजर्व के बड़े हिस्से में आम पर्यटकों के लिए नियमित पर्यटन गतिविधियां संचालित नहीं हो सकीं। अब परिस्थितियों में बदलाव के बाद वन विभाग यहां पर्यटन व्यवस्था विकसित करने की तैयारी कर रहा है।

सफारी के लिए तैयार किए जा रहे रूट और वाहन

छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडेय के अनुसार रिजर्व को 1 नवंबर से खोलने की दिशा में तैयारियां चल रही हैं। सफारी के लिए वाहनों की व्यवस्था करने और निर्धारित मार्ग तैयार करने का काम किया जा रहा है। शुरुआती चरण में दो से तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है। पर्यटन जोन और सफारी रूट को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के टाइगर कंजर्वेशन प्लान के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

रोज कितने पर्यटक जा सकेंगे? तय होगी सीमा

इंद्रावती टाइगर रिजर्व को खोलने से पहले वन विभाग पर्यटकों की संख्या को लेकर भी अध्ययन कर रहा है। इसके तहत कैरिंग कैपेसिटी का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रतिदिन प्रवेश करने वाले वाहनों और पर्यटकों की संख्या नियंत्रित रखी जा सके। इसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ जंगल और वन्यजीवों पर अतिरिक्त दबाव को रोकना है। इसलिए रिजर्व का पूरा क्षेत्र पर्यटकों के लिए एक साथ नहीं खोला जाएगा और संवेदनशील इलाकों में प्रवेश नियंत्रित रखा जा सकता है।

बाघ और वनभैंसे समेत कई वन्यजीवों का बसेरा

इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, वनभैंसा, गौर, स्लॉथ भालू, चीतल, जंगली सूअर और नीलगाय जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। यह क्षेत्र वनभैंसे के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में भी शामिल माना जाता है। यही वजह है कि इंद्रावती में शुरू होने वाला पर्यटन केवल सफारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बस्तर के जंगल और उसके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को करीब से समझने का अवसर भी दे सकता है।

बस्तर की आदिवासी संस्कृति से भी जुड़ सकता है पर्यटन

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। पर्यटन योजना में स्थानीय संस्कृति और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को पर्यटकों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर गाइड, सफारी ड्राइवर, हॉस्पिटैलिटी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावना है। हालांकि इन व्यवस्थाओं का अंतिम स्वरूप वन विभाग की आगामी योजना और दिशा-निर्देशों के बाद स्पष्ट होगा।

चार दशक बाद बस्तर पर्यटन को मिलेगी नई दिशा

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब 40 साल बाद संगठित पर्यटन शुरू करने की तैयारी बस्तर के पर्यटन मानचित्र के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। फिलहाल विभाग का ध्यान सफारी रूट, पर्यटन जोन, वाहनों की व्यवस्था, सुरक्षा और पर्यटकों की संख्या निर्धारित करने पर है। 1 नवंबर 2026 से प्रस्तावित शुरुआत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंद्रावती के जंगलों में पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।

नोट: 1 नवंबर की तारीख को उपलब्ध रिपोर्टों में विभाग की तैयारी/प्रस्तावित शुरुआत के रूप में बताया गया है। अंतिम सफारी रूट, बुकिंग प्रक्रिया, शुल्क और प्रवेश नियम वन विभाग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही निश्चित माने जाने चाहिए।

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बस्तर संवाददाता

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