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पर्यटन 17 जुलाई 2026 2 मिनट का पठन 17 जुलाई 2026

मलाणा गांव: भारत का अनोखा गांव छूने पर लग सकता है जुर्माना

अपडेट किया गया: 17 जुलाई 2026

मलाणा गांव: भारत का अनोखा गांव छूने पर लग सकता है जुर्माना

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बसा मलाणा गांव अपनी अनूठी परंपराओं, प्राचीन संस्कृति और अलग सामाजिक व्यवस्था के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो इसे भारत के सबसे अनोखे गांवों में शामिल करते हैं।

गांव में किसी चीज़ को छूना मना

मलाणा गांव में बाहरी लोगों को गांव की दीवारों, मंदिरों, घरों और कई सार्वजनिक संरचनाओं को छूने की अनुमति नहीं होती। स्थानीय परंपराओं के अनुसार पर्यटकों को गांव के लोगों के साथ भी अनावश्यक शारीरिक संपर्क से बचने की सलाह दी जाती है।

गांव के कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें बताया गया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर 1,000 से 2,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय परंपराओं का विशेष ध्यान रखते हैं।

खरीदारी का भी अलग तरीका

मलाणा में खरीदारी का तरीका भी अन्य जगहों से अलग है। कई दुकानों पर ग्राहक सीधे सामान को हाथ नहीं लगाते। वे भुगतान निर्धारित स्थान पर रखते हैं और दुकानदार सामान बाहर रख देता है, जिसे बाद में ग्राहक उठा लेता है। यह व्यवस्था स्थानीय परंपराओं के सम्मान के लिए अपनाई जाती है।

अपनी परंपराओं से चलता है गांव

मलाणा गांव अपनी विशिष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गांव का संचालन सदियों पुरानी परंपराओं और स्थानीय नियमों के आधार पर किया जाता है। गांव की अपनी पारंपरिक परिषद (स्थानीय संसद) है, जिसमें दो स्तर की व्यवस्था बताई जाती है। बड़े सदन में 11 सदस्य होते हैं, जिनमें 8 का चयन ग्रामीणों द्वारा किया जाता है, जबकि कारदार, गुर और पुजारी जैसे 3 सदस्य परंपरागत रूप से शामिल रहते हैं। छोटे सदन में गांव के प्रत्येक परिवार का सबसे बुजुर्ग सदस्य भाग लेता है।

पर्यटकों से नियमों का सम्मान करने की अपील

मलाणा की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी है। इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्थानीय नियमों और रीति-रिवाजों का सम्मान करें तथा गांव की सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करें।

मलाणा अपनी अनोखी संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक व्यवस्था के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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बस्तर संवाददाता

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