जगदलपुर Bastar Dussehra। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व के दौरान पारंपरिक व्यवस्थाओं के अतिरिक्त अन्य धार्मिक एवं बाहरी सामाजिक संगठनों को आयोजन की अनुमति नहीं देने की मांग को लेकर बस्तर संभाग के माझी, चालकी, पुजारी, पेरमा और पटेल प्रमुखों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि बस्तर दशहरा ऐतिहासिक जनजातीय संस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक है। पर्व की विभिन्न रस्मों और व्यवस्थाओं का संचालन पारंपरिक रूप से माझी, चालकी, पुजारी, पेरमा सहित अन्य समाज प्रमुखों की भूमिका के माध्यम से किया जाता रहा है।
पारंपरिक व्यवस्था बनाए रखने की मांग
ज्ञापन में स्थानीय पारंपरिक व्यवस्था और बस्तर दशहरा की धार्मिक-सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि दशहरा पर्व की अवधि में किसी भी प्रकार के समानांतर आयोजन से पर्व की मूल परंपराओं और व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि बस्तर दशहरा की पूरी अवधि के दौरान पारंपरिक आयोजन व्यवस्था के अतिरिक्त किसी भी बाहरी सामाजिक या धार्मिक संगठन को किसी अन्य आयोजन की अनुमति नहीं दी जाए।
प्रशासनिक निगरानी की भी मांग
ज्ञापन में पर्व के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन से विशेष निगरानी की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी तत्व पर नजर रखी जाए, जिससे पर्व के दौरान विवाद, व्यवधान या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ज्ञापन में प्रशासन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय जनजातीय समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
सांसद और विधायकों को भी भेजी प्रतिलिपि
ज्ञापन की प्रतिलिपि बस्तर लोकसभा सांसद, जगदलपुर विधानसभा विधायक, चित्रकोट विधानसभा विधायक और तहसीलदार जगदलपुर को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
ज्ञापन में बस्तर संभाग के माझी, चालकी, पुजारी, पेरमा एवं पटेल प्रमुखों की ओर से पारंपरिक व्यवस्था और बस्तर दशहरा की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।