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छत्तीसगढ़ समाचार • 5 अक्टूबर 2026 • 2 मिनट का पठन • 5 अक्टूबर 2026

अबूझमाड़ में बदलाव सुरक्षा कैंप बना आदिवासी बच्चों का छात्रावास

Abujhmad news-अबूझमाड़ में बदलाव की नई इबारत 15 साल तक रहा सुरक्षा कैंप, अब आदिवासी बच्चों का बन रहा भविष्य

अबूझमाड़ में बदलाव सुरक्षा कैंप बना आदिवासी बच्चों का छात्रावास

Narayanpur news। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में बदलाव की एक तस्वीर सामने आई है। नारायणपुर जिले के भाटपाल में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप रहे परिसर को अब जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास में बदल दिया गया है। कभी सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र रहा यह परिसर अब दूरस्थ गांवों से आने वाले बच्चों की पढ़ाई और उनके बेहतर भविष्य का आधार बन रहा है। बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत पुराने सुरक्षा कैंप को विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा के रूप में विकसित किया गया है। इससे दुर्गम और दूरस्थ गांवों के बच्चों को स्कूल के नजदीक सुरक्षित आवास मिलने के साथ नियमित पढ़ाई जारी रखने में मदद मिल रही है।

सुरक्षा कैंप से शिक्षा के केंद्र तक

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक सुरक्षा बलों की तैनाती का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी रही। क्षेत्र की परिस्थितियों में बदलाव के बाद परिसर खाली हुआ तो जिला प्रशासन ने इसे अनुपयोगी छोड़ने के बजाय शिक्षा के लिए उपयोग करने का निर्णय लिया। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की पहल पर परिसर को दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के रूप में विकसित किया गया। यहां 11 अगस्त 2026 से विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू की गई।

एक परिसर में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की सुविधा

भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप परिसर में वर्तमान में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित हैं। प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां 114 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में 39 विद्यार्थी यहां निवासरत हैं। यह छात्रावास एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय जरूरतों को भी पूरा कर रहा है। पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल के आसपास निजी आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। छात्रावास मिलने से परिवारों पर आने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हुआ है।

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बस्तर संवाददाता

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