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धार्मिक आस्थाएँ 27 अगस्त 2026 3 मिनट का पठन 15 घंटे पहले

पहाड़ों की तलहटी में विराजे गणेश, खुले आसमान के नीचे आस्था का अनोखा केंद्र

अपडेट किया गया: 56 मिनट पहले

पहाड़ों की तलहटी में विराजे गणेश, खुले आसमान के नीचे आस्था का अनोखा केंद्र

पहाड़ों की तलहटी में विराजे गणेश, खुले आसमान के नीचे होती है पूजा-अर्चना

कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के बड़ेडोंगर की पहाड़ियों की तलहटी में खुले आसमान के नीचे विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का खास केंद्र बनी हुई है। यहां न कोई भव्य मंदिर है, न गर्भगृह और न ही शिखर, लेकिन प्रकृति की गोद में विराजे गणेशजी के प्रति लोगों की आस्था वर्षों से कायम है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, संतान की कामना लेकर आने वाले दंपती यहां पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं। विशेष रूप से पुत्र की कामना को लेकर श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की बात कही जाती है। समय के साथ इस स्थान की जानकारी आसपास के क्षेत्रों में भी फैल रही है, जिसके चलते यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

पुजारी बोले- आस्था है, गारंटी नहीं

स्थल के पुजारी रूप सिंह कूदराम बताते हैं कि भगवान गणेश की प्रतिमा वर्षों से खुले में विराजमान है और यहां लगातार श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते रहे हैं। उनके अनुसार कई लोग संतान और पुत्र की कामना लेकर यहां आते हैं तथा कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की बात भी बताते हैं।

हालांकि पुजारी स्पष्ट करते हैं कि इसे किसी तरह की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। यह लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है।

मंदिर नहीं, प्रकृति की गोद में विराजे गणेश

बड़ेडोंगर की पहाड़ियों, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा का यह स्वरूप अपने आप में अलग है। श्रद्धालु यहां नारियल, फूल और प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग कुछ समय यहां बैठकर प्राकृतिक वातावरण में ध्यान और प्रार्थना भी करते हैं।

प्राकृतिक परिवेश और धार्मिक आस्था का यह संगम इस स्थल को क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है।

बस्तर की लोक आस्था से जुड़ी परंपरा

बस्तर अंचल में संतान प्राप्ति को लेकर कई लोक मान्यताएं और धार्मिक स्थल प्रचलित हैं। कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के आलोर गांव स्थित झाटीबन में मां लिंगेश्वरी के प्रति भी ऐसी मान्यता जुड़ी हुई है। इसी तरह बड़ेडोंगर की पहाड़ी तलहटी में विराजे गणेशजी के प्रति भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है।

इन स्थलों की मान्यताएं स्थानीय धार्मिक विश्वास और लोक परंपराओं से जुड़ी हुई हैं, जो पीढ़ियों से लोगों के बीच चली आ रही हैं।

धार्मिक पर्यटन का बन सकता है नया केंद्र

बड़ेडोंगर पहले से ही धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां मां दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। ऐसे में खुले आसमान के नीचे विराजे भगवान गणेश का यह स्थल धार्मिक पर्यटन की एक और कड़ी बन सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिमा के मूल स्वरूप और प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखते हुए यदि स्थल की लोककथा, इतिहास और स्थानीय मान्यताओं का दस्तावेजीकरण किया जाए तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो आने वाले समय में यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकता है।

प्रकृति की गोद में विराजे गणेशजी का यह स्थल बड़ेडोंगर की धार्मिक पहचान में एक अनूठी कड़ी जोड़ता है, जहां भव्य निर्माण से अधिक लोगों की आस्था और प्राकृतिक परिवेश अपनी अलग पहचान बनाते हैं।

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बस्तर संवाददाता

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