
कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ेतेवड़ा में धर्मांतरण और पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के पालन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेष ग्राम सभा आयोजित कराने की मांग करते हुए कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगातार धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं, जिससे आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। आवेदन में कहा गया है कि गोंड जनजाति की पारंपरिक प्रथाओं और सामाजिक मान्यताओं का पालन नहीं किया जा रहा है तथा जन्म, विवाह, मृत्यु सहित अन्य संस्कारों में समुदाय की परंपराओं की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि गांव के देवी-देवताओं और पारंपरिक आस्था केंद्रों के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति निर्मित हो रही है। उनका कहना है कि कई बार समझाइश देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है और गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
इसी विषय को लेकर ग्राम पंचायत बड़ेतेवड़ा द्वारा भी प्रशासन को पत्र भेजकर विशेष ग्राम सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी गई है। पंचायत का कहना है कि ग्राम सभा सदस्यों की मांग और गांव में उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए विशेष ग्राम सभा आयोजित करना आवश्यक हो गया है, ताकि सभी पक्षों की बात सुनकर लोकतांत्रिक तरीके से समाधान खोजा जा सके।
पंचायत द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अंतागढ़ तथा तहसीलदार आमाबेड़ा को भी सूचनार्थ भेजी गई है। अब ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विशेष ग्राम सभा के माध्यम से गांव की सामाजिक एकता, पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक चर्चा कर समाधान निकाला जा सकता है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
बड़ेतेवड़ा का यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां एक ओर ग्रामीण अपनी पारंपरिक मान्यताओं और संस्कृति के संरक्षण की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विशेष ग्राम सभा के माध्यम से स्थिति को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से सुलझाने की मांग कर रहे हैं।