बस्तर को केवल नक्सलवाद के नजरिए से नहीं, बल्कि उसके हजारों वर्षों के इतिहास, संस्कृति, लोकविश्वास और सामाजिक संघर्षों के साथ समझना हो तो ‘आमचो बस्तर’ एक महत्वपूर्ण कृति है। यह उपन्यास बस्तर के अतीत और वर्तमान के बीच एक ऐसा सेतु बनाता है, जो इतिहास, लोककथाओं और समकालीन यथार्थ को एक साथ पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है।
लेखक - राजीव रंजन प्रसाद
