just testing things
बस्तर के युवा अब अपनी जनजातीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को आधुनिक मंचों पर सहेजने और प्रस्तुत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
बस्तर के एक प्रमुख गाँव में आयोजित ग्राम सभा बैठक में जल, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
बस्तर की प्राचीन ‘ढोकरा’ धातु शिल्प कला को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिससे स्थानीय शिल्पकारों में नया उत्साह है।
इंद्रावती नदी पर बना चित्रकोट जलप्रपात, जिसे ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है, बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है।
बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान मुरिया दरबार में एक बार फिर देखने को मिली, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धा और उल्लास का संगम हुआ।