मुरिया दरबार में गूंजे मांदर की थाप, परंपराओं का जीवंत उत्सव

बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान मुरिया दरबार में एक बार फिर देखने को मिली, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धा और उल्लास का संगम हुआ।

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बस्तर के हृदय स्थलों में से एक में आयोजित मुरिया दरबार ने एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की जीवंतता को प्रदर्शित किया। यह दरबार मुरिया समुदाय के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उनके इतिहास, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक है।

दरबार की शुरुआत पारंपरिक मांदर की थाप और घोटुल नृत्य के साथ हुई। समुदाय के मुखिया ने पुरखों का आह्वान किया और गांव की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए, जबकि महिलाओं ने पारंपरिक गीतों से माहौल को भावपूर्ण बना दिया। हाट-बाजार जैसे माहौल में हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और वन उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

मुरिया दरबार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है, जो पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ता है।


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